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विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कांग्रेस सर्वे के सहारे जीत की पटकथा लिखने की तैयारी में।

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कांग्रेस सर्वे के सहारे जीत की पटकथा लिखने की तैयारी में।

साल 2027 का विधानसभा चुनाव दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा और साख का बड़ा इम्तिहान बन गया है। भाजपा तीसरी बार सत्ता में बने रहने की दावेदारी लेकर मैदान में उतरेगी, जबकि कांग्रेस पिछले लगभग एक दशक बाद फिर से सरकार पर काबिज होने की तैयारी में है। इसलिए दोनों ही पार्टियाँ शुरुआत से ही चुनावी तैयारियों में तेजी ला चुकी हैं।

भाजपा लक्ष्य 60 से अधिक सीटें, सर्वे पूरी

प्रदेश भाजपा ने आगामी चुनाव में 60 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। संगठन ने इसके मद्देनजर विधानसभा क्षेत्रों में दो दौर के सर्वे कराए हैं। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि सर्वे का मकसद सिटिंग विधायकों की वर्तमान स्थिति, जनता के बीच उनकी साख और कार्यकर्ताओं की पहचान करना है। इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती है और जिन बिंदुओं पर सुधार की जरूरत होती है, उन पर काम शुरू कर दिया जाता है।

मनवीर के अनुसार, पिछले कुछ चुनावों में भाजपा की स्थिति की बारीक समीक्षा की गई है। उन सीटों पर विशेष रणनीति बनायी जा रही है जहाँ पहले भाजपा जीती थी लेकिन 2022 में हार का सामना करना पड़ा। वहीं उन विधानसभा क्षेत्रों के लिए भी अलग रणनीति तय की गयी है जहाँ पार्टी अब तक जीत नहीं पायी है। मनवीर ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पार्टी 2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारी कर रही है।

कांग्रेस की रणनीति: गुप्त सर्वे और केटेगराइजेशन

दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस भी अपनी चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि चुनाव से पहले कई स्तरों पर सर्वे कराए जाते हैं, जिनमें आलाकमान की ओर से कराये जाने वाले गुप्त सर्वे भी शामिल हैं। कांग्रेस फिलहाल अपनी मौजूदा सीटों को दोबारा जीतने पर फोकस करेगी। जिन सीटों पर पार्टी सीमांत रूप से हारी थी, उन पर खास तरीके से काम किया जाएगा और जिन सीटों पर बेहद बड़े अंतर से हार हुई, उन पर अलग रणनीति अपनायी जायेगी। तैयारी के दौरान सभी विधानसभा क्षेत्रों को श्रेणीबद्ध कर लक्ष्य निर्धारित किये जाएंगे। कांग्रेस का लक्ष्य इस बार लगभग 50 सीटें जीतना बताया जा रहा है। सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि 15 जून तक प्रदेश प्रभारी का दौरा पूरा कर लिया जाएगा, उसके बाद कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और रणनीतियों पर तेजी से काम करेगी।

दोनों पार्टियों के सक्रिय होने के साथ ही उत्तराखंड का राजनीतिक परिदृश्य आगामी महीनों में और गर्माता दिख सकता है। चुनावी नतीजे हालांकि तभी स्पष्ट होंगे जब मतगणना के बाद सीटों का गणित सामने आयेगा, परन्तु फिलहाल दोनों दलों की तैयारियाँ तेज हैं और हर स्तर पर जोर दिया जा रहा है।

 

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