Ranikhetnews

हल्द्वानी में दरिंदगी : 12 साल की बालिका का कोतवाली से 200 मीटर दूर छः घंटे में दो बार अपहरण, दो दिन तक अलग-अलग युवकों ने किया दुष्कर्म।

हल्द्वानी में दरिंदगी : 12 साल की बालिका का कोतवाली से 200 मीटर दूर छः घंटे में दो बार अपहरण, दो दिन तक अलग-अलग युवकों ने किया दुष्कर्म।

कुमाऊँ के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी से एक ऐसी खबर सामने आयी जिसने इंसानियत का सर शर्म से झुका दिया। बड़ी बहन की डाँट से नाराज़ होकर घर से निकली 12 वर्षीय बच्ची से दो युवको ने दुष्कर्म किया है। बच्ची जब मंगलवार रात हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन के सामने बर्फ वाली गली में पहुंची तो उसे वहां विक्रम मिला। वह रात करीब 12 बजे पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने मुखानी स्थित फोटो स्टूडियो ले गया। यहां हवस में अंधे विक्रम ने बच्ची के साथ कई बार दुष्कर्म किया। बच्ची रोती रही लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा। इसके बाद बुधवार सुबह साढ़े छह बजे वह उसे उसी रोडवेज के सामने वाली गली में छोड़ गया जहाँ से उसे उठाया था।

जिसके बाद बदहवास बच्ची सुबह साढ़े छः बजे किसी तरह पटेल चौक पहुंची तो वहां उसे एक अन्य युवक गौलापार निवासी सौरभ मिला। पिछले साढ़े छः घंटे कई बार दुष्कर्म झेल चुकी बच्ची को मदद चाहिए थी और वह इस बार सौरभ पर भरोसा कर बैठी। सौरभ उसे अपने साथ शक्तिफार्म लेकर चला गया। जहाँ उसने कई बार बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बृहस्पतिवार को दोपहर में किसी समय मौका मिलने पर सौरभ का फ़ोन हाथ आने पर उसने अपने घर पर फ़ोन कर घटना की जानकारी दी। जिसके बाद परिजन कोतवाली पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर पीड़िता को बचाया। इसके बाद पुलिस ने CCTV और अन्य सबूतों और बच्ची द्वारा बताई गई लोकेशन के आधार पर पहले दुष्कर्म के आरोपी को भी गिरफ्तार किया

हल्द्वानी पुलिस की कार्यशैली सवालो के घेरे में –

जिस जगह से (रोडवेज के सामने वाली गली) से बच्ची का दोनों बार अपहरण किया गया वो कोतवाली हल्द्वानी से मात्र 200 मीटर दूरी पर है। मंगलवार की रात गायब बच्ची की सूचना बुधवार सुबह पुलिस को दे दी गयी थी। लेकिन हल्द्वानी पुलिस बृहस्पतिवार तक कुछ पता नहीं लगा पाई। बृहस्पतिवार की दोपहर पीड़िता के फ़ोन आने के बाद ही बच्ची की लोकेशन का पता लग सका। बर्फ वाली गली के पास ही पुलिस अधिकारियों के आवास भी हैं। ऐसे में इस घटना के बाद से पुलिस की गश्त पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही अफसरों के हवा-हवाई दावों की भी पोल खुल गई है। पुलिस पहले मामले को गुमशुदगी से जोड़कर देख रही थी लेकिन जैसे पता चला कि बच्ची दरिंदगी का शिकार हुई है तो पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। पूरा घटनाक्रम गुमशुदगी के मामलों में पुलिस के शुरुआती गोल्डन ऑवर्स में लचर कार्यशैली की ओर इशारा कर रहा है। पूरी वारदात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पीड़िता खुद फोन नहीं कर पाती तो क्या पुलिस उसके पास समय रहते पहुंच पाती। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस को सीसीटीवी हासिल करने में कितना समय लग गया जो वह जांच के नाम पर परिजनों को टरकाती रही। यह सवाल केवल इस मामले का नहीं, बल्कि गुमशुदा बच्चों की तलाश के पूरे तंत्र पर उठता है। यह स्थिति तब है जब एसएसपी कई बार पुलिस कर्मियों को उनकी कार्यशैली पर लताड़ चुके हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top