
थाना जलाने भर से UAPA कैसे लग जाएगा?”—हल्द्वानी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से पूछे सवाल, उत्तराखंड सरकार की याचिका खारिज, अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा मामले में मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को हाईकोर्ट से मिली जमानत को बरकरार रखा और उत्तराखंड सरकार की याचिका खारिज कर दी। साथ ही अदालत ने मामले में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) लगाने पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि केवल भीड़ द्वारा पुलिस थाने में आग लगाने से स्वतः UAPA लागू नहीं हो जाता।
अदालत की टिप्पणी: “सार्वजनिक व्यवस्था और UAPA अलग-अलग अवधारणाएं हैं”
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) और UAPA के तहत आने वाले अपराध अलग-अलग प्रकृति के होते हैं। जस्टिस बागची ने पूछा, “यदि कोई भीड़ पुलिस थाने में आग लगा देती है, तो मात्र इस आधार पर UAPA कैसे लागू होगा?” अदालत ने कहा कि UAPA लगाने के लिए कानून में निर्धारित विशेष परिस्थितियों और गंभीर आधारों की आवश्यकता होती है, न कि केवल हिंसक घटना के आधार पर।
जमानत मामला: क्यों खारिज हुई उत्तराखंड सरकार की याचिका?
उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 16 अप्रैल, 2026 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अब्दुल मलिक को 8 फरवरी, 2024 की बनभूलपुरा हिंसा के सिलसिले में जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही हाईकोर्ट के आदेश में विस्तृत कारण न हों, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में केवल इसी आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि अदालत ने न्यायिक विवेक का प्रयोग किया है—विशेषकर तब जब आरोपी लंबी अवधि से हिरासत में हो—तो उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
UAPA पर अदालत का संदेह: क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में UAPA की धाराएं जोड़ने को लेकर गंभीर संदेह जताया। यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि UAPA देश के सबसे सख्त कानूनों में शामिल है और इसके तहत गिरफ्तारी तथा जमानत के नियम सामान्य मामलों की तुलना में काफी कठोर होते हैं। अदालत ने संकेत दिया कि वह यह जांचना चाहता है कि क्या इस मामले में वास्तव में ऐसे तत्व मौजूद थे, जो इसे सामान्य कानून-व्यवस्था के मामले से आगे बढ़ाकर UAPA के दायरे में लाते हों।
पृष्ठभूमि: बनभूलपुरा हिंसा मामला
8 फरवरी, 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी एक मदरसे और नमाज स्थल को ध्वस्त किए जाने के बाद दंगे भड़क उठे थे, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मी व स्थानीय लोग घायल हो गए थे। अब्दुल मलिक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), UAPA, शस्त्र अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज है।
