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3 दिन से कैंची में भयानक जाम, 3 साल में 18 किलोमीटर बाईपास बनाने में छूटे सरकार के पसीने, वही 4 साल में 210 किमी का दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे बनकर हो गया तैयार। पढ़िए हमारा विशेष सम्पादकीय।

3 दिन से कैंची में भयानक जाम, 3 साल में 18 किलोमीटर बाईपास बनाने में छूटे सरकार के पसीने, वही 4 साल में 210 किमी का दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे बनकर हो गया तैयार। पढ़िए हमारा विशेष सम्पादकीय।

पिछले 3 दिन से कैंची धाम में लगने वाले जाम से कुमाऊँ का बड़ा हिस्सा प्रभित हो रहा है। हालत ये हो गई है कि अल्मोड़ा रानीखेत से 3 घंटे में हल्द्वानी का सफर पूरा करने में यात्रियों को 6 से 7 घंटे तक का समय लगा है। जिससे एक बार फिर बायपास रोड के निर्माण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सालों बीत जाने के बाद भी मात्र 18 किलोमीटर की सड़क तैयार करने में सरकार के पसीने छूट चुके हैं। कहीं न कही सरकार की इस सड़क के लिए प्रतिबद्धता में कमी स्पष्ट दिखाई देती है।

वही दूसरी तरफ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया। प्रोजेक्ट की कुल लम्बाई 210 किलोमीटर है। अप्रैल 2026 तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू हो चुका है, जिससे दिल्ली से देहरादून की दूरी 2.30 घंटे में तय हो रही है। उम्मीद है की अगले सप्ताह प्रधानमंत्री देहरादून दौरे में इसका औपचारिक उद्घाटन भी करेंगे। इसकी लागत लगभग 13,000 करोड़ रुपये है।

दूसरी तरफ कैंची धाम है जहाँ पिछले 4 – 5 सालों से स्थानीय जनता सहित पर्यटक जाम में फंसे हुए है। कई लोग अपनी जान गवां चुके है, कई लोगों के पेपर छूट गए, न जाने कैसी कैसी परेशानी यहाँ की जनता झेल रही है। लेकिन भवाली-कैंची धाम बाईपास रोड (रातीघाट से जुड़ने वाली) का निर्माण कछुवे की चाल से हो रहा है। जब चार साल में इसी प्रदेश में 210 किलोमीटर का एक्सप्रेस वे बन सकता है तो 3 साल में 18 किलोमीटर का बायपास क्यों नहीं बन सकता है? ये प्रश्न मुंहबाए खड़ा है। इस बाईपास का निर्माण कार्य 2023 के अंत में शुरू हुआ है लेकिन अभी तक मात्र 18 किलोमीटर का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।

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