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नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पर भारी विरोध के बीच उत्तराखंड विधानसभा से पास हुआ निंदा प्रस्ताव।

नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पर भारी विरोध के बीच उत्तराखंड विधानसभा से पास हुआ निंदा प्रस्ताव।

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के असफल होने के बाद आज मंगलवार को उत्तराखंड विधानसभा में इस पर चर्चा के लिए एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया। सत्र के दौरान सत्ताधारी और विपक्षी दलों ने अपने‑अपने दृष्टिकोण पेश किए और राज्य‑केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखी बहस हुई।


विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की नारियों को उनका अधिकार अवश्य मिलेगा और राजनीति में भी आधी आबादी को उनकी पूरी भूमिका मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाएं अब केवल “सहभागिता” तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं, निर्णय ले रही हैं और भविष्य का निर्माण भी कर रही हैं।

सीएम धामी ने बताया कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को विपक्ष को “ध्यान से पढ़ना चाहिए”, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में परिसीमन व वृद्धि के प्रावधानों को सही ढंग से समझ सकें। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड की केवेंद्र स्तरीय संख्या 5 से बढ़कर 8 हो जाए और विधानसभा की सीटें 70 से बढ़कर 105 हो जाएं तो विपक्ष की बौखलाहट क्यों हो रही है।

सदन में कांग्रेस पार्टी पर सीधा हमला करते हुए सीएम धामी ने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को हमेशा वोट बैंक की राजनीति की चिंता रहती है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा सरकार महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को वास्तविक अभियान में बदल रही है।

सीएम ने यह भी कहा कि नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी के दौर में मंत्रिमंडल में केवल एक महिला कैबिनेट मंत्री या मुख्यमंत्री जैसा नेतृत्व होता था, जबकि नरेंद्र मोदी की सरकार में 7 महिला मंत्री और मुख्यमंत्री मौजूद हैं, जो महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का सबूत हैं।
यशपाल आर्य: विशेष सत्र का औचित्य पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने विशेष सत्र के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह कानून 2023 में ही पारित हो चुका था तो इसे लागू करने में इतना समय लगाने का क्या कारण है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 2029 के चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने की बात कर रही है, लेकिन जनगणना और परिसीमन के लंबे समय तक चलने की स्थिति में यह संभव भी नहीं होगा।

आर्य ने नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को “आधी आबादी के साथ धोखा” बताया और कहा कि यह एक विशेष सोच के तहत लाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन व्यवहार में आरक्षण का अधिकार वास्तविकता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

यशपाल आर्य ने यह भी मांग रखी कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों पर ही 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि राज्यों की संख्या बढ़ाकर राजनीतिक दावेदारी की जटिलता न बढ़े। उन्होंने उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की मांग की और आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर अधिकतम है।

सत्र के दौरान दोनों पक्षों के बीच महिला आरक्षण, संघीय संरचना, परिसीमन और वोट बैंक की राजनीति जैसे मुद्दों पर तीखी वाद‑विवाद देखने को मिला। जबकि सत्ता पक्ष ने इसे महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल बताया, वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक और संवैधानिक गलत ढांचे का नतीजा मानते हुए निंदा की।

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