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हर तरफ धाकड़ धामी की गूँज लेकिन भाजपा में सब कुछ नहीं है ठीक, क्या गदरपुर से लिखी जाएगी धामी को सत्ता से बेदखल करने की पटकथा ?

हर तरफ धाकड़ धामी की गूँज लेकिन भाजपा में सब कुछ नहीं है ठीक, क्या गदरपुर से लिखी जाएगी धामी को सत्ता से बेदखल करने की पटकथा ?

एक तरफ सोशल मीडिया से लेकर पोर्टल और समाचार पत्रों की खबरों तक धाकड़ धामी की गूँज सुनाई देती है। लेकिन दूसरी तरफ भाजपा के अंदर ही कई नेता मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से नाराज भी चल रहे है। फिर चाहे वो पुराने नेता हो जो मंत्रिमंडल में उनकी अनदेखी से नाराज़ हो या वो नेता जो अपने दिल में मुख्यमंत्री का सपना पाले हुए हो। सभी 2027 से पहले एकजुट होकर पुष्कर धामी के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए तैयार दिख रहे हैं। इस समय भाजपा में जो कुछ चल रहा है कम से कम उन घटनाओँ से तो ऐसे ही संकेत मिलते दिख रहे हैं। गदरपुर विधायक अरविन्द पांडेय के घर दो दिन में भाजपा के दो बड़े नेता अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र रावत के पहुंचने से अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने वालों में सबसे बड़ा नाम गदरपुर से विधायक अरविन्द पांडेय का है। कई बार ऐसी स्थिति भी आयी जब भाजपा उनके बयानों या तौर तरीकों से असहज हो गई, वही स्थानीय प्रशासन भी पांडेय के सत्तारूढ़ दल का विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद भी लगातार उन पर कई प्रकार की कार्यवाही करता नज़र आया है। जो कहीं न कहीं भाजपा में उनकी स्थिति को कमजोर करने की कार्यवाई के तौर पर देखा जाता रहा है।

बीते सोमवार को अरविन्द पांडेय से मिलने भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी पहुंचे। जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। कार्यकर्ताओं से सम्बोधन के बाद उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में अरविन्द पांडेय से बात की। इसके अगले ही दिन आज मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद त्रिवेंद्र रावत पांडेय से मिलने पहुंचे। उन्होंने भी आधे घंटे से ज्यादा बंद कमरे में पांडेय से बात की। राजनितिक विश्लेषक इसे सामान्य मुलाकात से अधिक 2027 की पटकथा के रूप में देख रहे हैं।

सभी को विदित है कि अनिल बलूनी एक समय मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदारों में रहे हैं। हालाँकि राजनितिक परिस्तिथियाँ सही समय पर उनके पक्ष में नहीं आ पाई और पुष्कर धामी को मुख्यमंत्री पद मिल गया। लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व से बलूनी की करीबी किसी से छुपी नहीं है। वो भाजपा में अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं। वही त्रिवेंद्र रावत को भी एक समय में मुख्यमंत्री पद से हटाकर पुष्कर धामी को मुख्यमंत्री बनाये जाने की टीस बाकी है। जबकि मंत्री पद के मजबूत दावेदार अरविन्द पांडेय को मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने हाशिये पर खड़ा कर दिया जिससे वह लगातार नाराज़ चल रहे हैं। ऐसे में इन तीनों का एक साथ आना और भाजपा के अन्य नाराज़ नेताओ को एकजुट करना पुष्कर धामी के लिए खतरे की घंटी भी हो सकती है।

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