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मिशन 2027 नहीं , मिशन 2026 !!! दिसंबर में हो सकते है पांच राज्यों के चुनाव। राजनीतिक पार्टियों में सरगर्मियां बढ़ी।

मिशन 2027 नहीं , मिशन 2026 !!! दिसंबर में हो सकते है पांच राज्यों के चुनाव। राजनीतिक पार्टियों में सरगर्मियां बढ़ी।

पांच राज्यों—उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर—में अगले साल फरवरी 2027 में सपन्न होने वाले विधानसभा चुनाव इसी नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव कराए जाने की सम्भावना सामने आई है। सरकार का मकसद आने वाले साल की फरवरी में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना के दूसरे चरण के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता पर किसी प्रकार की बाधा नहीं आने देना है, इसलिए चुनावों को फरवरी—मार्च से पहले संपन्न कराने पर विचार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी तक निर्धारित है। इस दौरान कर्मचारियों द्वारा सामाजिक-आर्थिक जानकारियाँ एकत्र की जाएँगी। अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में कम से कम 5.5 लाख, जबकि उत्तराखंड, मणिपुर व गोवा में लगभग 50-50 हजार और पंजाब में 2 लाख सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। ऐसे में जनगणना और चुनाव दोनों के लिए कर्मचारियों की मांग टकरा सकती है, जो केंद्र के जल्द चुनाव कराने के प्रस्ताव का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी की राज्य इकाइयों को सतर्क करते हुए चुनावी तैयारियों को पहले ही अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। पार्टी के तीन राज्य इकाइयों—उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब—के सूत्रों के अनुसार नेतृत्व ने बूथ कमेटियों का गठन, संगठनात्मक नियुक्तियों और अन्य चुनावी तैयारियों को जुलाई के पहले सप्ताह तक पूरा करने को कहा है। हालांकि उत्तराखंड को राहत मिलने की संभावना है क्योंकि वहां के पहाड़ी क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण सितंबर में हो जाने के कारण जल्दी चुनाव की बाध्यता कम रहेगी ।

विपक्षी दलों में भी सक्रियता बढ़ गई है। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बैठक में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने जल्द चुनाव की संभावनाओं पर चर्चा की। पंजाब में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेता अरविंद केजरीवाल ने भी शनिवार-पश्चिम प्रवास के दौरान पार्टी को नवंबर में चुनाव कराने की जानकारी साझा कर राज्य इकाई को तैयार रहने का निर्देश दिया है।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने हालांकि सरकार की ओर से इन राज्यों में शीघ्र चुनाव कराने की किसी आधिकारिक सूचना से इन्कार किया है। बावजूद इसके, चुनाव होने की स्थिति में मतदाता सूची बाधा नहीं बनेगी: सूत्रों का कहना है कि इन राज्यों में मतदाता सूची (एसआईआर) की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और आवश्यकता पड़ने पर जनवरी में बनने वाली अंतिम सूची को तय समय से तीन महीने पहले अंतिम रूप दिया जा सकता है।

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