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रानीखेत में पहली बार दर्ज हुई दुर्लभ अटलस मॉथ; फोटोग्राफर कमल गोस्वामी ने खींची दुर्लभ प्राजति की फोटो।

रानीखेत में पहली बार दर्ज हुई दुर्लभ अटलस मॉथ; फोटोग्राफर कमल गोस्वामी ने खींची दुर्लभ प्राजति की फोटो।

रानीखेत (अल्मोड़ा)। कुमाऊं क्षेत्र के रानीखेत में पहली बार दुनिया के सबसे बड़े पतंगों में शामिल दुर्लभ अटलस मॉथ का दस्तावेजीकरण किया गया है। नेचर व बर्ड फोटोग्राफर कमल गोस्वामी ने यह विशालकाय मॉथ दीवान सिंह हॉल के पास जंगल में अपने कैमरे में कैद किया। प्रकृति विशेषज्ञ व वन अधिकारी इसे स्थानीय जंगलों की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर स्थिति का सकारात्मक संकेत बता रहे हैं।

अटलस मॉथ अपने विशाल पंखों और आकर्षक रंगों के लिए विख्यात है। इसके पंखों का फैलाव सामान्यतः 25 से 30 सेंटीमीटर तक होता है, जिससे यह विश्व के सबसे बड़े मॉथों में गिनी जाती है। पंखों के सिरे सांप के सिर जैसे दिखाई देते हैं, जो शिकारियों को भ्रमित कर इसके बचने में मदद करते हैं।

विशेषताएँ और जीवन चक्र

– विशाल आकार: पंख फैलाव 25–30 सेमी।
– प्राकृतिक सुरक्षा: पंखों के सिरे सांप के सिर जैसे दिखते हैं।
– जीवनचक्र: वयस्क अवस्था में यह भोजन नहीं करता; लार्वा चरण में संचित ऊर्जा के सहारे कुछ ही दिनों में प्रजनन कर जीवन पूरा करता है।
– सीमित आयु: वयस्क अवस्था का जीवनकाल आमतौर पर एक से दो सप्ताह तक होता है।

फोटोग्राफर कमल गोस्वामी ने कहा, “रानीखेत में अटलस मॉथ का कैमरे में कैद होना मेरे लिए बेहद खास क्षण है। यह केवल एक दुर्लभ प्रजाति का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि यहां के जंगल जैव विविधता से समृद्ध हैं। यदि प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखे गए तो भविष्य में और भी दुर्लभ प्रजातियों को देखा जा सकेगा।”

अरविंद कुमार, फॉरेस्ट बीट अफसर, वनस्पति उद्यान (नैनीताल) ने बताया कि अटलस मॉथ जैसे संवेदनशील कीट केवल उन्हीं क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहां वनस्पति विविधता और प्राकृतिक आवास अच्छी स्थिति में हों। उन्होंने कहा, “रानीखेत में इसका दिखाई देना स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत है। इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए जंगलों की सुरक्षा अत्यावश्यक है।”

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