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भतरौंजखान अस्पताल में लगे थे ताले, रानीखेत से भी रेफेर किया, अल्मोड़ा पहुंचने तक पूर्व प्रधान की हो गई मौत। परिजनों के आरोपों के बाद जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने बिठाई जांच।

भतरौंजखान अस्पताल में लगे थे ताले, रानीखेत से भी रेफेर किया, अल्मोड़ा पहुंचने तक पूर्व प्रधान गणेश गिरी की हो गई मौत। परिजनों के आरोपों के बाद जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने बिठाई जांच।

उत्तराखंड की स्वास्थ सेवाओं की पोल खोलता एक मामला फिर सामने आया है जिसने आमजन में आक्रोश भर दिया है। अल्मोड़ा जिले के भतरौंजखान में दीवार से गिर कर गंभीर रूप से घायल हुए एक पूर्व प्रधान गणेश गिरी को समय पर इलाज न मिलने से उनकी मौत हो गयी। घायल को पहले भतरौंजखान अस्पताल लाया गया तो वहाँ ताला लटका मिला, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर रानीखेत पहुंचे तो यहाँ से अल्मोड़ा रेफेर कर दिया गया। अल्मोड़ा पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

मृतक गणेश गिरी के भाई प्रदीप गोस्वामी और परिजनों के अनुसार भौनली के पूर्व प्रधान 42 वर्षीय गणेश गिरी जब दीवार से गिरकर घायल हुए, उनके सिर पर गहरी चोट आई थी। रात 11 बजे उन्हें भतरौंजखान अस्पताल लाया गया। यहाँ सभी कमरों में टाला लटका हुआ था और दीवार पर लिखे गए एक इमरजेंसी नंबर पर कॉल करने पर उसमे भी इनकमिंग कॉल बंद थी। परिजनों द्वारा इसका एक वीडियो भी बनाया जो सोशल मीडिया पर लोगो द्वारा शेयर किया जा रहा है। परिजनों के काफी शोर मचाने पर एक कर्मचारी और कुछ देर बाद चिकित्साधिकारी डॉ. करन वहां पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने तुरंत इलाज शुरू करने के बजाय मौके पर पुलिस बुला ली।

इसके बाद परिजन घायल गणेश गिरी को लेकर भतरौंजखान से रानीखेत पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि रानीखेत में भी डॉक्टर्स ने प्राथमिक उपचार देने के बजाय उनकी गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए अल्मोड़ा के लिए रेफेर कर दिया। सुबह साढ़े पांच बजे रानीखेत से 45 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा पहुंचने पर बेस अस्पताल के डॉक्टर्स ने गणेश गिरी को मृत घोषित कर दिया। घटना के सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं।

परिजनों का कहना है कि ने अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में न चिकित्सक समय पर मिले, न आपातकालीन व्यवस्था काम आई और न ही प्राथमिक उपचार मिला। अगर दो अस्पतालों में प्राथमिक उपचार मिल जाता तो गणेश गिरी की जान बच जाती। वही सीएमओ अल्मोड़ा डॉ. एचसी पंत का कहना है कि भतरौजखान अस्पताल में चिकित्साधिकारी मौजूद थे। मरीज को जो भी उचित इलाज मिलना था वह किया गया। हालत गंभीर देखते हुए ही उन्हें रेफर किया गया था।

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