
रानीखेत में श्री नरेश तलरेजा मेमोरियल ओपन
राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप का भव्य आयोजन, 300 से अधिक खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा
रानीखेत। मजखाली स्थित अशोक हॉल गर्ल्स रेजिडेंशियल स्कूल में दो और तीन अक्टूबर को प्रथम श्री नरेश तलरेजा मेमोरियल ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप आयोजित की गई। हिल टाइगर्स ताइक्वांडो अकादमी की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों और संस्थानों की 10 से अधिक टीमों के 300 से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया।

प्रतियोगिता में तेलंगाना, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तराखंड और एसएससीबी समेत विभिन्न राज्यों की टीमों ने हिस्सा लिया। खिलाड़ियों ने क्योरुगी और पूमसे के अलग-अलग आयु एवं भार वर्गों में प्रतिभा का प्रदर्शन किया।मुख्य अतिथि एजुकेशन ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल गुरप्रीत सिंह ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान कमलेश जोशी, हिमांशु उपाध्याय, प्रभात महारा, उमेश बेदी, बृजेश जोशी, सचिन शाह, दीपक नेगी, देवांशु शाह गंगोला, आशुतोष शाह और कैप्टन उमा समेत कई अतिथि मौजूद रहे।

प्रतियोगिता में अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों ने भी अपनी टीमों के साथ प्रतिभाग किया। इनमें विजय बहादुर, कमलेश तिवारी, कमल जोशी, गिरीश रावत और सुरेश बहादुर समेत अन्य प्रशिक्षक शामिल रहे। प्रतियोगिता के संचालन में उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों से पहुंचे करीब 12 निर्णायकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
टीम चैंपियनशिप में आर्मी टीम रानीखेत ने पहला स्थान हासिल किया। टीम के कोच महावीर बिष्ट रहे। फिटिस्तान अकादमी, नोएडा की टीम दूसरे और इंडियन डोजांग, दिल्ली की टीम तीसरे स्थान पर रही। क्रमश: आशीष प्रताप सिंह और प्रिंस राजपूत टीम के कोच रहे।

प्रतियोगिता में एसटीए पिथौरागढ़ को सबसे समर्पित टीम के रूप में विशेष ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। टीम के कोच सुरेश बहादुर रहे। खेल भावना, अनुशासन और समर्पण के लिए टीम की सराहना की गई। टूर्नामेंट डायरेक्टर सुमित गोयल और ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी कव्या तलरेजा ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजकों ने कहा कि प्रतियोगिता के माध्यम से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर का मंच देने के साथ रानीखेत को ताइक्वांडो के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने का प्रयास किया गया।

स्वर्गीय नरेश तलरेजा उत्तराखंड में ताइक्वांडो को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में रहे। उनके खेल जीवन, प्रशिक्षण और ताइक्वांडो के प्रति समर्पण को याद करते हुए आयोजित यह प्रतियोगिता उनकी स्मृति को समर्पित रही। आयोजन के जरिए उनकी खेल विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया गया।


