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बचा लो रानीखेत को ! जाली के बाहर से गोल्फ ग्राउंड को झांकते पर्यटक और रानीखेत की बदहाली बयान करता लेख।

बचा लो रानीखेत को ! जाली के बाहर से गोल्फ ग्राउंड को झांकते पर्यटक और रानीखेत की बदहाली बयान करता लेख।

रानीखेत में गोल्फ ग्राउंड के बाहर खड़े पर्यटकों को देख दिल में फिर से बरसों पुरानी पीड़ा फिर जाग उठी है। ये देखकर अफ़सोस होता है कि रानीखेत के सारे नेता मिलकर भी एक गोल्फ ग्राउंड को स्थायी रूप से नहीं खुलवा पाए, क्योंकि यहां अपना स्वार्थ पहले देखा जाता है। अपने काम करवाने के लिए जनता के सामने शोर किया जाता है, और अफसरों के कमरे में कॉफी पी कर उनकी तारीफ की जाती है।

रानीखेत में ऐसा क्या बचा है जो पर्यटक यहां घूमने आयेगा? क्या दिखाओगे उसे? जो पर्यटक रानीखेत पहुंचता भी है उसके पास एक दिन काटने के लिए भी कोई जगह नहीं है। गोल्फ ग्राउंड बंद है, रानी झील के पानी में गटर का पानी मिला हुआ है, वहां नाव में बैठो तो पानी से बदबू आती है, बाकी भी सब टूटा फूटा है। आशियाना पार्क कबाड़ा हो चुका है, एक भी झूला, एक भी लाइट, एक भी फव्वारा सही हालात में नहीं है।

चौबटिया गार्डन बर्बाद हो चुका है, पर्यटक वहां पहुंच कर पूछता है यहां क्या देखना है? 10 मिनट में झूला देवी और 10 मिनट में हैड़ाखान मंदिर घूम लिया जाता है। उसके बाद वो बाजार आता है तो बाजार की हालत खत्म है। ऐसा कोई सामान नहीं है, जिसे खरीदने के लिए टूरिस्ट का मन हो, वो शॉपिंग भी नहीं कर सकता। दो चार काम चलाऊ रेस्टोरेंट है वहां खाना खा कर टूरिस्ट वापस चल देता है।

आप मेरे लेख को नेगेटिव कह सकते हो, मेरी सोच को खराब कह सकते हो, लेकिन मैनें वही लिखा है जो कड़वी सच्चाई है। दर्द होता है अपने शहर का ये हाल देखकर। आज से 15 साल पहले तक भी रानीखेत पर्यटकों से भरा रहता था। शाम को पर्यटक सड़को पर घूमते दिखते थे। होटल रेस्टोरेंट फुल हुआ करते थे। लेकिन समय के साथ यहां के प्रभावशाली वर्ग ने अपने फायदे के लिए अफसरों की चापलूसी के ऐसा सिस्टम तैयार किया है, कि एक भी नया काम शहर में नहीं हो रहा है। कोई ही कोई मरमत हो रही है। सब कुछ बर्बादी की राह पर है।

आशियाना पार्क की एक दीवार कई सालों से टूटी हुई है। यहां किसी के बस का इतना भी नहीं की उस दीवार की मरमत के लिए सरकार से पैसा ले आए। सड़क में गड्ढे है या गढ्ढों में सड़क है पता ही नहीं चल रहा। क्या क्या लिखूं, जिस कोने पर नजर डालो वहां बर्बादी ही दिखती है।

अगर आज भी काम शुरू किया जाए तो इस शहर को दोबारा ठीक हालात में लाने में ही 10 साल लग जाने है। इस शहर के खेवनहारों तुम अपना निजी फायदा तो कर लोगे, लेकिन याद रखना शहर खत्म हो रहा है तो तुम भी आबाद नहीं हो सकते। इसलिए आखिरी समय चल रहा है, बचा लो रानीखेत को !!!

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