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जनकवि गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिर्दा’ की जीवनी पर आधारित दीपा तिवारी की पुस्तक ‘बोल व्यापारी तब क्या होगा’ का विमोचन हुआ।

जनकवि गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिर्दा’ की जीवनी पर आधारित दीपा तिवारी की पुस्तक ‘बोल व्यापारी तब क्या होगा’ का विमोचन हुआ।

हल्द्वानी। सुप्रसिद्ध जनकवि गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिर्दा’ की 16वीं पुण्यतिथि पर रविवार को वानिकी संस्थान हल्द्वानी में साहित्य, संगीत और विचारों का संगम देखने को मिला। क्रिएटिव उत्तराखंड और समय साक्ष्य की संयुक्त टीम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गिर्दा के जनपक्षधर विचारों की वर्तमान दौर में प्रासंगिकता पर विचार गोष्ठी हुई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शिक्षिका और लेखिका दीपा तिवारी की पुस्तक ‘बोल व्यापारी तब क्या होगा’ का विमोचन रहा। यह पुस्तक जनकवि गिर्दा की जीवनी पर आधारित है।

कार्यक्रम में संगीत, साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता और शिक्षा जगत से जुड़े विद्वानों और रचनाकारों ने शिरकत की। वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा ने अपनी रचनाओं और जनगीतों के माध्यम से आम आदमी के संघर्ष, सामाजिक सरोकारों और जनभावनाओं को प्रभावशाली स्वर दिया। आज के समय में भी उनके विचार और रचनाएं समाज को नई दिशा देने का काम करती हैं।

विचार गोष्ठी में गिर्दा के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और जनआंदोलनों से जुड़ी भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा केवल कवि नहीं, बल्कि समाज की चेतना को स्वर देने वाले जनकवि थे। उनके गीतों में पहाड़, प्रकृति, समाज और आम जनमानस की पीड़ा साफ दिखाई देती है।कार्यक्रम के दौरान गिर्दा के लोकप्रिय जनगीतों की गूंज पूरे परिसर में छाई रही। गीतों और विचारों के माध्यम से उपस्थित लोगों ने जनकवि गिर्दा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

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