
कैंची धाम के जाम ने रोक दी पहाड़ की रफ्तार ! रानीखेत में दूध-सब्जी तक की सप्लाई ठप,12 घंटे में हल्द्वानी से अल्मोड़ा पहुंची दो महिलाये, तो बेटे ने फेसबुक पर शेयर किया अपना दर्द।
रानीखेत। कैंची धाम क्षेत्र में लगातार लग रहे जाम का असर अब रानीखेत और अल्मोड़ा – बागेश्वर जिलों तक दिखाई देने लगा है। यातायात व्यवस्था चरमराने से हजारों यात्रियों के साथ जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। हल्द्वानी से रात में रवाना होने वाली दूध और सब्जियों की गाड़ियां शनिवार दोपहर तक रानीखेत नहीं पहुंच सकीं। वहीं दिल्ली और देहरादून से रात में चलने वाली रोडवेज बसें, जो सामान्य दिनों में सुबह पांच से छह बजे तक रानीखेत पहुंच जाती हैं, दोपहर तक कैंची धाम क्षेत्र में जाम में फंसी रहीं।

जाम में फंसे यात्रियों को घंटों तक भूखे-प्यासे और गर्मी में वाहनों के भीतर रहने को मजबूर होना पड़ा। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई। लंबे समय तक जाम में फंसे यात्रियों के सामने शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी संकट खड़ा हो गया। खासकर मधुमेह समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अष्टमी के कारण दूध की मांग बढ़ी, गाड़ियां रास्ते में फंसी
रानीखेत के प्रमुख दूध व्यवसायी हर्षवर्धन पंत ने बताया कि श्राद्ध पक्ष की अष्टमी के कारण शुक्रवार को दूध की मांग सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक रहती है। लेकिन प्रमुख ब्रांडों की दूध आपूर्ति करने वाली गाड़ियां रास्ते में जाम में फंसी होने के कारण दोपहर तक रानीखेत नहीं पहुंच सकीं। इससे बाजार में दूध की कमी होने से उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ी और व्यवसाइयों को भी नुक्सान झेलना पड़ा है।

गंभीर मरीजों के लिए भी बढ़ी चिंता
पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सड़क मार्ग बाधित होने से अल्मोड़ा, बागेश्वर और रानीखेत क्षेत्र में किसी गंभीर मरीज या दुर्घटना में घायल व्यक्ति को हल्द्वानी ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में एक व्यक्ति ने दावा किया है कि दो अक्टूबर को उनकी 72 वर्षीय मां और 80 वर्षीय ताई हल्द्वानी से अल्मोड़ा के लिए रवाना हुई थीं, लेकिन करीब साढ़े 11 घंटे के सफर के बाद रात 11:30 बजे तक वे गरमपानी ही पहुंच पाईं।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
लगातार बिगड़ रही यातायात व्यवस्था के बीच प्रशासन की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कैंची धाम में लगने वाले जाम का असर अब केवल नैनीताल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव कुमाऊं के कई जिलों पर पड़ रहा है। ऐसे में यातायात सुचारु कराने और यात्रियों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
वहीं लोगों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नैनीताल-अल्मोड़ा, रानीखेत, द्वाराहाट, जागेश्वर, बागेश्वर, सोमेश्वर और कपकोट क्षेत्र के विधायक तथा अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ और नैनीताल लोकसभा क्षेत्र के सांसद इस संकट से निपटने के लिए कोई भी प्रयास करते नहीं दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि नेताओ और अफसरों ने स्पष्ट करना चाहिए कि जाम की समस्या के समाधान और यात्रियों को राहत पहुंचाने के लिए संबंधित स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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