
‘धामी हटाओ—उत्तराखंड की भूमि बचाओ’ – सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने पर करन माहरा ने सरकार को घेरा।
रानीखेत। उत्तराखंड की सार्वजनिक संपत्तियों और हजारों बीघा भूमि को निजी हाथों में सौंपे जाने की चर्चाओं को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को रानीखेत में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने प्रेस वार्ता कर आईएमपीसीएल मोहान, चौबटिया उद्यान, रानीखेत स्थित इंस्पेक्शन बंगले और करीब सात हजार बीघा भूमि से जुड़े मामलों को उठाया। उन्होंने सरकार से इन संपत्तियों के भविष्य और इन्हें लेकर बनाई जा रही योजनाओं पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

माहरा ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों, सार्वजनिक संस्थानों और जमीन को लेकर होने वाले फैसलों में जनता को विश्वास में लिया जाना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि इन संपत्तियों को लेकर उसकी वास्तविक मंशा और कार्ययोजना क्या है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रस्तावित फैसलों से प्रदेश और स्थानीय लोगों को क्या लाभ मिलेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने सरकार को प्रदेश की संपत्तियों और धरोहरों की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में सार्वजनिक परिसंपत्तियों को निजी हाथों में देने से जुड़े किसी भी निर्णय पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेश और विकास के दावों के बीच जनता के अधिकारों तथा सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण की अनदेखी नहीं की जा सकती।
कांग्रेस नेता ने पहाड़ में रोजगार और पलायन की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर युवा रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सार्वजनिक संपत्तियों के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे फैसलों में स्थानीय युवाओं, किसानों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।
माहरा ने कहा कि उत्तराखंड की जमीन और प्रदेश की धरोहरों पर यहां की जनता का पहला अधिकार है। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर चुप नहीं बैठेगी और जरूरत पड़ने पर सदन से लेकर सड़क तक सरकार से जवाब मांगेगी। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और जनता के हितों के विपरीत होने वाले निर्णयों का विरोध किया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने ‘धामी हटाओ—उत्तराखंड की भूमि बचाओ’ का नारा देते हुए सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और प्रदेश की जनता के अधिकारों को लेकर सरकार से जवाब देने की मांग की।

