
रानीखेत की किरन भगत ने ऐपण के सहारे खुद को दी नई पहचान, देश के विभिन्न महानगरों तक ऐपण कला को पहुंचा कर परिवार को दे रही आर्थिक सम्बल।
रानीखेत की किरन भगत ने ऐपण के क्षेत्र में अच्छी सफलता हासिल की है। साधारण परिवार की किरन रानीखेत में एक दुकान में काम करती है और समय निकाल कर अपनी रूचि को तराशते हुए ऐपण पर काम कर ऐपण को रोजगार का माध्यम बनाकर अपने परिवार को आर्थिक सम्बल प्रदान कर रही हैं।

उनके पिता सतीश चंद्र भगत का लम्बे समय से स्वास्थ्य खराब है जिस कारण उनकी मां भगवती देवी, दूध बेचकर अपने परिवार का गुजारा करती हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आदर्श बालिका इंटर कॉलेज, रानीखेत से हुई, जबकि उच्च शिक्षा उन्होंने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत से प्राप्त की। विषम परिस्तिथियों में अपने परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए उन्होंने एक कपडे की दुकान में काम करना शुरू किया, लेकिन उनके मन में आगे बढ़ने की चाह बनी रही। जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने ऐपण का सहारा लिया।

ऐपण में पारंगत ना होने के कारण उनके लिए इस पार काम करना मुश्किल हो रहा था, जिसके लिए उन्होंने यूट्यूब का सहारा लिया और घर की देहरी, कपड़े और अन्य सतहों पर ऐपण बनाने का अभ्यास कर इस कला में निपुण होती चली गई। जिसके बाद पिछले दो वर्षो में उन्होंने व्यावसायिक रूप से इस पार काम करना शुरू किया। लेकिन पिछले 5 महीने से उन्होंने अपने वीडियो फोटो सोशल मीडिया पर साझा करने शुरू किये जिससे उनके काम को प्रसिद्धि मिलनी शुरू हुई।

अब किरन को केवल आस पास के क्षेत्रों से ही नहीं बलिक देश के कई महानगरों से भी आर्डर मिल रहे है, इसके साथ ही वो अमेरिका तक अपना आर्डर भेज चुकी है। जिससे इस काम के लिए उनका जोश लगातार बढ़ रहा है। किरन भगत पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के ऐपण उत्पाद तैयार कर रही हैं। उनके काम में ऐपण तोरण (दरवाज़े और बाइक के लिए), दीवार सजावट, वुडन फ्रेम ऐपण, कैनवास पेंटिंग, पारंपरिक फर्श ऐपण (चौक), पूजा चौकी, लक्ष्मी पगचिन्ह, शुभ-लाभ, गणेश और देवी-देवताओं के ऐपण शामिल हैं। इसके अलावा वह दीया स्टैंड, पूजा थाली, करवा चौथ ऐपण थाली, गृह प्रवेश और विवाह विशेष ऐपण भी बनाती हैं।

