
कैंची धाम ट्रस्ट पर लगाए घोटाले के आरोप, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, नोटिस जारी कर जवाब माँगा।
कैंची धाम ट्रस्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में करोड़ों रुपये के चढ़ावे से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर स्वतः संज्ञान लिया है। पिथौरागढ़ के ठाकुर सिंह डसीला की शिकायत पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के पंजीकरण विवरण, ट्रस्टी नाम, कार्यालय पता, ट्रस्टियों की संख्या और आय-व्यय का कोई सार्वजनिक हिसाब उपलब्ध नहीं है। हर साल करोड़ों-अरबों रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन ऑडिट रिपोर्ट, संपत्ति विवरण या विदेशी दान (FCRA) का ब्योरा नहीं दिया जाता।स्थानीय ग्रामीणों जिन्होंने अपनी ज़मीन मंदिर के लिए दान की थी उन्हें भी प्रबंधन में शामिल न करने और निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठे हैं।
इस मामले में पत्र मिलाने पर कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है और इसे जनहित याचिका बनाया है। कोर्ट ने सम्बंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है, और रजिस्ट्रार को न्याय मित्र को दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।ट्रस्ट अधिनियम 1882 के तहत सभी विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
