
बिट्टू की साँसे टूट रही थी, चलने की हालात भी नहीं थी, फिर भी डॉक्टर ने फिट बताकर वापस भेज दिया घर। अगली सुबह बिट्टू की हो गई मौत। सवालों के घेरे में अल्मोड़ा का बेस हॉस्पिटल।
पहाड़ में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली किसी से छुई नहीं है। सरकार भले ही कितने दावे करे लेकिन आये दिन कोई ना कोई खबर पहाड़ की स्वस्थ सेवाओं की पोल खोल ही देती है। ऐसी ही एक घटना अल्मोड़ा में सामने आयी है जहाँ एक व्यक्ति उखड़ती सांसो के साथ पंहुचा था साथ ही चलने की हालत में भी नहीं था। लेकिन बेस हॉस्पिटल अल्मोड़ा के डॉक्टर ने उसे फिट बता कर घर भेज दिया और इसके अगली सुबह ही इलाज ना मिलाने से उस व्यक्ति मौत हो गई।
मीडिया में छपी खबरों के अनुसार 33 वर्षीय युवक बिट्टू कुमार मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा ब्लॉक के सिरसोला गांव का निवासी थे । वर्तमान में वह अल्मोड़ा के दुगालखोला में किराए पर रहते थे। यहाँ वह एक सरकारी विभाग में कॉट्रैक्ट की गाड़ी चलाते थे और अकेले रहते थे उनके माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी।

वह कुछ समय से बीमार थे और जब बीमारी के चलते उनकी हालत बिगड़ने लगी तो परिचित उनकी मदद को आगे आए। बताया जा रहा है कि वह सांस नहीं ले पा रहे थे और चलना भी मुश्किल था। बुधवार दोपहर 2:30 बजे उनके साथी बद्रीश कुमार और गंगा थापा उनको लेकर बेस हॉस्पिटल अल्मोड़ा पहुंचे थे। लेकिन अस्पताल स्टाफ ने उनको लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। काफी जद्दो जहद के बाद उनका एक्स-रे करवाया गया लेकिन डॉक्टर ने उन्हें फिट बताकर केवल 45 मिनट में 3:15 वापस बजे घर भेज दिया। घर जाने के की अगली सुबह बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे बिट्टू ने दम तोड़ दिया।
उनके साथियों का कहना है कि अगर डॉक्टर उस वक्त ऑक्सीजन लगा देते या हायर सेंटर रेफर कर देते तो बिट्टू की जान बच सकती थी। उन लोगों ने डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
