
अजब गजब हाल : बेतालघाट ब्लॉक प्रमुख चुनाव में हुयी गोलीबारी मामले में आपसी समझौते के बाद हाई कोर्ट ने मामले को निरस्त किया। बड़ा सवाल आम जनता का जो विश्वास डिगा, उसका जिम्मेदार कौन ?
बेतालघाट ब्लॉक प्रमुख चुनाव में हुई फायरिंग और झड़प के मामले में बड़ा फैसला आया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने दोनों पक्षों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। इस घटना के दौरान दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई थी, जिसमे एक व्यक्ति के पैर में गोली लगी थी। इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ गंभीर धाराओं समेत गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी।

पुलिस ने जगदीश पलड़िया की शिकायत पर अंकित साह और उनके 15 समर्थकों तथा भुवन तिवारी की शिकायत पर नितेश शाही और उनके 14 समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। हाल ही में सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दोनों पक्षों में आपसी समझौता हो चुका है और अब विवाद समाप्त हो गया है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों एफआईआर को निरस्त करते हुए मामले को खत्म कर दिया।
लेकिन इस मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए है। एक घटना जिसने पूरे उत्तराखंड में चर्चा हुयी, दो पुलिस अधिकारीयों को ससपेंड कर दिया गया। जिस घटना ने आम जनता में मन में पंचायत स्तरीय चुनाव् को लेकर कई सवाल खड़े किये हो क्या उसे केवल आपसी समझौते से समाप्त किया जान कहीं न कहीं कानून व्यवस्थ का मजाक नहीं है? क्या ये आने वाले समय में गुंडागर्दी को बढ़ावा नहीं देगा ?

