
रोडवेज बसों का वन वे नियम यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी, रोडवेज डिपो के घाटे में जाने की भी संभावना।
रानीखेत रोडवेज बसों को वन वे किये जाने के बाद अब नगर में मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। नगर में एक बड़ा वर्ग है जो इसे सही बता रहा है, इस वर्ग का मानना है कि बाजार से बस निकलना बंद होने के बाद नगर को जाम से मुक्ति मिलेगी और व्यापार बढ़ेगा। वही दूसरा वर्ग इससे होने वाले नुकसानों पर अपनी बात रख रहा है और इस फैसले को आम जनता के विरुद्ध बता रहा है।

हम आपको बता दें कि अभी तक रोडवेज की सभी बसें सदर बाजार – गाँधी चौक होते हुए केमू स्टेशन पहुँचती थी। अब एसएसपी अल्मोड़ा ने निर्देश के बाद सभी बसें रोडवेज से विजय चौक – ठंडी सड़क होते हुए सीधे थापा एस्टेट पहुंच रही है। इस फैसले से सबसे अधिक वह वर्ग प्रभावित हो रहा है जो कि रोडवेज की बसों में सफर करता है। उन लोगों के समक्ष अब सामान के साथ रोडवेज पहुंचने की चुनौती आ खड़ी हुयी है। केमू स्टेशन रानीखेत का सबसे मुख्य स्टेशन है, यहाँ एक ही स्थान पर केमू, रोडवेज और टैक्सी सभी तरह की सुविधाएं मिल जाती है। दूर दराज से रानीखेत पहुंचने वाले यात्री यही पर रोडवेज की बसों का इंतज़ार करते थे।

रानीखेत में लोकल परिवहन व्यवस्था शून्य है, कुछ समय पहले पिंक ऑटो चलाने की कोशिश हुयी लेकिन कई कारणों के चलते वो व्यवस्था फेल हो गई। ऐसे में बस पकड़ने के लिए केमू से रोडवेज पहुंचना एक बड़ी चुनौती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद रोडवेज में यात्रियों की संख्या घटना तय है। जिसका बड़ा आर्थिक नुकसान रोडवेज को भुगतना होगा। संभव है कि घाटे में जाने के बाद रानीखेत डिपो का अस्तित्व हमेश के लिए मिटा दिया जाये। पहले भी कई बार रानीखेत डिपो को भवाली और अल्मोड़ा में विलय करने की कोशिश की जा चुकी है।
ऐसी स्थिति से निबटने के लिए कई लोगों का सुझाव है कि रोडवेज से जाने वाली बसों को पूर्व की भांति सदर बाजार से निकलने की छूट दी जानी चाहिए और वन वे करने के लिए रोडवेज को आने वाली बसों को वाया ठंडी सड़क भेजा जाना चाहिए। इससे वन वे का नियम भी सुरक्षित रहेगा और यात्रियों को भी परेशानी से बचाया जा सकेगा।
