
देघाट से रानीखेत तक बदलनी पड़ी तीन एम्बुलेंस, परिजनों का आरोप, डॉक्टर ने बिना देखे किया रेफेर।
सल्ट/स्याल्दे (अल्मोड़ा) — अल्मोड़ा जिले के दूरस्थ देघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में 1 जून को हुई घटनाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमताओं और रेफरल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीमारदारों ने आरोप लगाया है कि एक गंभीर अवस्था में पहुंची बुजुर्ग मरीज को बिना प्राथमिक जांच के रेफर किया गया और देघाट से रानीखेत तक तीन एम्बुलेंस बदलने बदलनी पड़ी। घटना से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम चक केलानी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बालादत्त धौंडियाल अपनी अत्यंत बीमार वृद्ध महिला को आपातकालीन उपचार के लिए CHC देघाट पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड पर कोई वरिष्ठ चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। देर से आए एक नवनियुक्त या प्रशिक्षु चिकित्सक ने मरीज का इलाज किए बिना, कोई प्राथमिक पैथोलॉजिकल या डायग्नोस्टिक टेस्ट कराए बिना ही उसे रानीखेत उपजिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
रेफरल के बाद मरीज को ले जाने में शुरूआती एम्बुलेंस तकनीकी रूप से जर्जर मिली। एम्बुलेंस के स्ट्रेचर/काउच की हालत इतनी खराब थी कि गंभीर स्थिति में रही महिला को लेटाने तक की सुविधा नहीं थी और उन्हें बैठाकर यात्रा करनी पड़ी। भिकियासैंण से दूसरी एम्बुलेंस द्वारा आगे भेजे जाने पर वह वाहन ताड़ीखेत के पास मार्ग में खराब हो गया। तीसरी एम्बुलेंस मिलने पर ही मरीज को रानीखेत पहुंचाया जा सका। परिजनों ने बताया कि करीब 70–80 किलोमीटर के सफर के दौरान तीन-तीन एम्बुलेंस बदलनी पड़ीं, जो क्रिटिकल रोगियों के लिए जानलेवा हो सकती है।
घटना के बाद क्षेत्र के युवाओं और मीडिया प्रतिनिधियों में तीव्र नाराजगी है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं मीडिया प्रतिनिधि सुमित मानराल ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा, CMO, स्वास्थ्य सचिव और उत्तराखंड के स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेज कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सल्ट व स्याल्दे के बड़े हिस्से की गरीब आबादी CHC देघाट पर निर्भर है, लेकिन वरिष्ठ डॉक्टरों की अनुपस्थिति और जीर्ण-शीर्ण एम्बुलेंसों के कारण जनता की जान जोखिम में डाली जा रही है।
