
रानीखेत और धर्मेंद्र की यादे – फिल्मों की शूटिंग के लिए धर्मेंद्र दो बार आये थे रानीखेत। रानीखेत में फिल्मायी गयी दोनों फिल्म “शिकार” और “हुकूमत” धर्मेंद्र के करियर की बड़ी फिल्म साबित हुई थी। आज उनके देहांत पर रानीखेत न्यूज़ की तरफ से श्रद्धांजलि स्वरुप प्रस्तुत है ये लेख।
फिल्म स्टार और बॉलीवुड के ही मैन धर्मेंद्र का 89 की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर आज पूरे देश में उनके चाहने वालों में शोक व्याप्त है। आज हम अपने इस लेख के माध्यम से उन्हें अपनी ओर से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहें हैं। बॉलीवुड में रानीखेत को प्रसिद्धि दिलाने में धर्मेंद्र की दो फिल्मो का विशेष योगदान रहा है। धर्मेंद्र फिल्मो की शूटिंग के लिए दो बार रानीखेत आए थे। 1968 में रिलीज हुई उनकी फिल्म शिकार और 1987 में हुकूमत फिल्म का बड़ा हिस्सा रानीखेत में शूट किया गया था।

शिकार फिल्म ने रानीखेत को बॉलीवुड में दिलाई थी नई पहचान
“शिकार” फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से रानीखेत के जंगलों में की गयी थी। यहाँ का प्राकृतिक दृश्य और वातावरण फिल्म की कहानी के लिए उपयुक्त रहा था। इस फिल्म में आशा पारेख भी थीं, रानीखेत चौबटिया सड़क पर झुलादेवी से आगे एक मोड़ पर आशा पारेख फिल्म की शूटिंग के दौरान गिर गई थी। तभी से उस जगह को “आशा पारेख बैंड (मोड़) ” के नाम से जाना जाने लगा है। कुछ समय पहले सेना द्वारा इस फिल्म की याद में उसी मोड़ पर धर्मेंद्र – आशा पारेख और और एक जीप का कट आउट यहाँ रखा गया है। ये जीप रानीखेत के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता पूरन महरा की थी। जिसकी फोटो आप नीचे देख रहे हैं।

इसके अलावा रानीखेत के गोल्फ ग्राउंड समेत कई जगह पर इस फिल्म की शूटिंग की गयी थी। 1968 में रिलीज हुयी इस फिल्म ने बॉलीवुड के फिल्म निर्माताओं का ध्यान रानीखेत की और खींचा और इसके बाद आने वाले सालों में रानीखेत में अनेकों फिल्मों की शूटिंग की गयी थी। हालाँकि इससे पहले बड़ी फिल्मो में दिलीप कुमार की मधुमती भी रानीखेत में शूट की गई थी।
रानीखेत में शूट हुयी हुकूमत बनी धर्मेंद्र के करियर की बड़ी फिल्म
1987 में रिलीज हुई धर्मेंद्र की एक अन्य फिल्म “हुकूमत” की शूटिंग भी रानीखेत हुई थी। इस फिल्म में वह एसपी अर्जुन सिंह की भूमिका में थे। फिल्म में जिस बंगले में उनका आवास दिखाया गया था वह रानीखेत का वन विभाग का मॉलरोड स्थित गेस्ट हाउस है। शम्मी कपूर भी इस फिल्म के लिए रानीखेत आए थे। इसके अलावा रेजांगला ग्राउंड आदि स्थानों पर भी इस फिल्म की शूटिंग हुई थी। नैनी झील के किनारे, मल्लीताल फील्ड, माल रोड, कलैक्ट्रेट, भवाली, भीमताल में भी इस फिल्म की शूटिंग की गयी थी। फिल्म की शूटिंग लगभग एक महीने तक चली थी।

फिल्म में रानीखेत के जंगल, माल रोड और अन्य प्राकृतिक स्थल शूटिंग के लिए इस्तेमाल किए गए थे। धर्मेंद्र शूटिंग के दौरान आसानी से स्थानीय लोगों के बीच घुलमिल जाते थे और प्रशंसकों के साथ ऑटोग्राफ और फोटो खिंचवाने में कंजूसी नहीं करते थे। फिल्म 1987 में रिलीज़ हुई और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। उस समय इस फिल्म ने रिकॉर्डतोड़ 11 करोड़ की कमाई की थी। ये धर्मेंद्र के करियर की एक महत्वपूर्ण फिल्म रही है।

इस फिल्म की शूटिंग की धुंधली सी याद अभी भी मेरे जेहन में हैं। मेरे पिता धर्मेंद्र के बड़े फैन थे, और वह हम दोनों भाइयों और मेरी माताजी को मॉलरोड में वन विभाग के गेस्ट हाउस में फिल्म की शूटिंग दिखने ले गए थे। उस समय एक बड़ा सा खिड़की का शीशा टूटने का सीन फिल्माया जा रहा था। उस समय मेरी उम्र यही 5 – 6 साल की रही होगी।
शिकार फिल्म का ये गीत धर्मेंद्र जी को श्रद्धांजलि स्वरुप प्रस्तुत है।
