
मेरी आपबीती :- जब बारात से वापस आते समय जब मैं और मेरे साथ के अन्य लोग मरते मरते बचे। थोड़ी सी सावधानी से दुर्घटनाओं पर लग सकती है लगाम।
बारात से वापस आते समय जब मैं और मेरे साथ के अन्य लोग मरते मरते बचे। आपने ध्यान दिया होगा कि शादियों का सीजन आते ही बारात की गाड़ियों के गिरने की खबर लगातार आती रहती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण नशा और नींद होते हैं।
लगभग 7 साल पहले सन 2018 में, मैं एक शादी में रानीखेत से काशीपुर गया था, रात की शादी थी, गर्मियों का समय था। लगभग 3 बजे तक हम सभी लोग जगे हुए थे, सुबह भी 6 बजे वापसी की तैयारी शुरू हो गई, हल्ला गुल्ला शुरू हो गया। हमारे साथ जो ड्राइवर गया था उसका और हमारा नींद और थकान से सुबह के समय हाल बेहाल था। बारात काशीपुर से वापस आयी तो हम सभी को रामनगर पहुंचते पहुंचते नींद आ गयी। लेकिन ड्राइवर को तो गाडी चलानी ही थी, वो कैसे सो सकता है।
सौराल पर ड्राइवर ने गाडी रोकी और नींद भागने के लिए मुँह धोया चाय पी। फिर वहां से निकलते ही आगे बढ़ते बढ़ते हम फिर से सो गए। लेकिन हमारे साथ एक व्यक्ति थे, काशीपुर में उनका कोई रिश्तेदार था तो वह 11 बजे अपने रिश्तेदार के घर चले गए आराम से सोये और सुबह विदाई के समय वापस आ गए। वह गाडी में लगातार जगे हुए थे, बाकि सभी सो रहे थे।
भतरौंजखान से आगे रीचि पहुंचते पहुंचते ड्राइवर को भी नींद आ गयी और एक मोड़ पर गाडी सीधे खाई की तरफ चली गयी, जो व्यक्ति जाग रहे थे वो ड्राइवर के बगल में ही थे, वह जोर से चिल्लाये और स्टेयरिंग को घुमाने की कोशिश की। उनकी आवाज़ से ड्राइवर जाग गया और ब्रेक दबा दिए। जब गाडी से उतर कर देखा तो आगे का पहिया खाई से केवल दो से तीन इंच ही बचा हुआ था। बस एक पल की बात थी, और अगले पल हम सब गहरी खाई में गिर जाते।
इसलिए आप सभी बारात के समय इस बात का ध्यान दीजिये कि रात की बारात में गए ड्राइवर के सोने की अच्छी व्यवस्था करें उसे पूरा आराम दें और दिन की शादी में गए ड्राइवर को किसी भी हाल में नशा ना करने दें। इससे बारातों में होने वाली दुर्घटनाओं पर बहुत हद तक लगाम लगायी जा सकती है।
