
आखिर क्यों सार्वजनिक कार्यक्रमों में सरकारी स्कूल के बच्चों को नहीं आतिथ्य सम्मान, कब तक इन बच्चो का इस्तेमाल कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भीड़ के रूप होता रहेगा?
ये फोटो रानीखेत के ताड़ीखेत के श्रद्धानन्द मैदान में आयोजित रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम की है। कार्यक्रम में आये हुए वयस्क आयोजकों के अतिथि है तो कार्यक्रम में आए हुए बच्चे भी आयोजनकर्ताओं के अतिथि ही होते हैं। तो फिर आखिर ऐसा क्यों है कि बच्चो को मिटटी में बैठा दिया जाता है। जब कार्यक्रम में कुर्सियां आ सकती हैं, बैनर आ सकता है, ट्रॉफी इत्यादि समान आ सकता है, तो ताड़ीखेत के टेंट हाउस से ही स्कूटी के आगे रखकर 100 रूपये किराये में बच्चो के लिए दरी भी आ सकती हैं।

लेकिन दिक्कत सोच की है क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों में अक्सर सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले गरीब घरों के बच्चो को केवल भीड़ ही मान लिया जाता है। कुछ लोग कहेंगे की हम भी ऐसे ही स्कूल में ज़मीन पर ही बैठे है। तो उन लोगों से सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ कि अगर कुछ गलत पुराने समय में हुआ हो, तो उसे परम्परा बनाने की नहीं उसमे सुधार करने और स्तिथियो को बेहतर बनाने की आवश्यकता होती है।
