
हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में 50% पद खाली,:मरीज बोले- यहां डॉक्टर नहीं; हॉस्पिटल का दावा- सिलेक्शन के बाद जॉइन नहीं करते डॉक्टर
हल्द्वानी का सुशीला तिवारी अस्पताल (STH) कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख सरकारी अस्पताल है, जहां डॉक्टरों की कमी लंबे समय से एक बड़ी समस्या बनी हुई है। मरीजों की शिकायतें और अस्पताल प्रशासन के दावों के बीच यह विवाद बार-बार सामने आता रहता है।
डॉक्टरों की कमी का आंकड़ा :- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अस्पताल और संबद्ध मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 40-60% पद खाली बताए जाते हैं। उदाहरण के लिए, 2023 में 30-40% कमी की बात कही गई, जबकि 2021 और हालिया रिपोर्ट्स में 60% तक रिक्तियां दर्ज की गईं। प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे विशेष पद प्रभावित हैं, जिससे ओपीडी, सर्जरी और विशेष विभाग जैसे मानसिक रोग विभाग पूरी तरह चिकित्सक-विहीन हो जाते हैं।

मरीजों की शिकायतें :- पर्वतीय जिलों से रोज 2,000-3,000 मरीज आते हैं, लेकिन डॉक्टर न मिलने पर उन्हें निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। हालिया वीडियो में वार्डों में चींटियां चलने और सुविधाओं की कमी के आरोप लगे। कर्मचारियों ने भी 2025 में 5 महीने वेतन न मिलने पर कार्य बहिष्कार किया, जिससे मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष :- प्राचार्य और चिकित्सा निदेशक का कहना है कि इंटरव्यू होते रहते हैं, नए डॉक्टर (जैसे 36 हालिया) आते हैं, लेकिन सिलेक्शन के बाद कई जॉइन नहीं करते। नवंबर 2025 में घोषणा हुई कि सभी पद एक माह में भरे जाएंगे। एनओसी मिलने पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया गया।
