
रानीखेत महाविद्यालय, रानीखेत की मेधावी शोध छात्रा कुमारी सोनिया ने पीएचडी फाइनल में मिली सफलता।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत की मेधावी शोध छात्रा कुमारी सोनिया ने विश्वविद्यालय के डी.एस.बी. परिसर, नैनीताल में आयोजित पीएचडी फाइनल वाइवा परीक्षा में अत्यंत उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता प्राप्त की है।
उनके द्वारा “कुमाऊँ के टी.बी. सेनेटोरियम का ऐतिहासिक अध्ययन” विषय पर यह शोध कुमाऊँ क्षेत्र के चिकित्सा इतिहास की एक अनूठी कृति है। भवाली टी.बी. सेनेटोरियम की स्थापना 1912 में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासनकाल में हुई थी। हिमालय की तलहटी में चीड़ के घने जंगलों के मध्य स्थित यह संस्थान एशिया का सबसे बड़ा क्षय रोग (टी.बी.) उपचार केंद्र के रूप में विख्यात था। यहाँ ‘ओपन-एयर थेरेपी’ का अभिनव प्रयोग किया गया, जिसमें शुद्ध हिमालयी वायु, सूर्य प्रकाश एवं प्राकृतिक पर्यावरण के माध्यम से रोगियों का उपचार किया जाता था। यह शोध न केवल उत्तराखंड के चिकित्सा इतिहास को समृद्ध करता है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण, स्वास्थ्य पर्यटन एवं ऐतिहासिक संरक्षण नीतियों के लिए भी मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होगा।

शोध निर्देशक डॉ. पंकज प्रियदर्शी, सहायक प्रोफेसर, इतिहास विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत। बाह्य परीक्षक प्रो. अमित कुमार सुमन, किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय। वाइवा परीक्षा में उपस्थित प्रमुख विद्वान प्रो. संजय घिल्डियाल (समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, डी.एस.बी. परिसर) प्रो. संजय टम्टा (प्रोफेसर),डॉ. रितेश साह, डॉ. शिवानी रावत, डॉ॰ मनोज बाफिला, डॉ॰ शिवराज कपकोटी एवं इतिहास विभाग के अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे।

शोध निर्देशक डॉ. पंकज प्रियदर्शी की इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर महाविद्यालय परिवार ने भव्य स्वागत किया।माननीय प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने कहा, “कुमारी सोनिया का यह शोध कुमाऊँ के चिकित्सा इतिहास को समृद्ध करने वाली ऐतिहासिक कृति है। डॉ. पंकज प्रियदर्शी के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय है।”प्रो. पी.एन. तिवारी, डॉ. महिराज मेहरा, डॉ. दीपा पांडे, डॉ. जे.एस. रावत, डॉ. मुकुल कुमार, डॉ. बी.बी. भट्ट सहित समस्त प्राध्यापकगण ने शोध छात्रा एवं निर्देशक को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
