
भांजी से दुष्कर्म में मामा को 20 साल की जेल, दुष्कर्म के बाद भी कोर्ट में मामा को बचाती रही भांजी और माँ।
बागेश्वर: विशेष सत्र न्यायालय ने भांजी से दुष्कर्म व गर्भधारण के मामले में आरोपी सगे मामा को दोषी ठहराया और उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने डीएनए रिपोर्ट को निर्णायक सबूत मानते हुए यह फैसला दिया। जुर्माना न भरने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना होगा।
प्रकरण की जानकारी के अनुसार, मामला बैजनाथ थाना क्षेत्र का है। 26 फरवरी 2024 को कक्षा 11 की नाबालिग छात्रा को अचानक पेट में दर्द आने पर सीएचसी बैजनाथ लाया गया था। अल्ट्रासाउंड में पता चला कि वह लगभग तीन माह की गर्भवती है। सूचना पर पुलिस और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने मामले की जांच व काउंसलिंग की।
प्रारम्भिक जांच में पीड़िता ने बताया कि नवंबर 2023 में गांव में हुए एक विवाह समारोह के दौरान, जब उसके नाना-नानी घर पर नहीं थे, तब उसके सगे मामा ने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने शुरुआत में दबाव बनाकर और गुमराह करने के प्रयास में पुलिस को अन्य युवकों के नाम दिए। बाद में पीड़िता और उसकी मां ने अदालत में बयान बदलने की कोशिश की, पर वे दलीलें अदालत द्वारा खारिज कर दी गईं।
न्यायालय के निर्देश पर गर्भ समाप्त कराकर भ्रूण का डीएनए सैंपल लिया गया। विधि विज्ञान प्रयोगशाला, देहरादून की रिपोर्ट में प्रमाणित हुआ कि भ्रूण की जैविक माता पीड़िता ही है और जैविक पिता आरोपी मामा ही हैं। अदालत ने गवाहों और द्रव्यों, विशेषकर डीएनए रिपोर्ट को संदेह से परे मानते हुए आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने दो लाख रुपये के जुर्माने में से 1.75 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने, साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश दिया है कि पीड़िता को अलग से पांच लाख रुपये के मुआवजे की व्यवस्था की जाए।
निर्णय में न्यायालय ने कहा है कि बच्चों के विरुद्ध ऐसे जघन्य लैंगिक अपराध समाज की नैतिकता को धक्का पहुँचाते हैं और इसलिए कठोर दंड के माध्यम से निवारक संदेश देना आवश्यक है। (नाबालिग पीड़िता की गरिमा व निजता का संरक्षण करते हुए समाचार में आरोपी का वास्तविक नाम परिवर्तित किया गया है।)
