
‘आर्य’ जाति SC सूची में नहीं, तो राहुल पर SC/ST एक्ट में FIR कैसे? राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर को अधिवक्ता ने बताया फर्जी, दावे ने मचाई सनसनी।
हल्द्वानी। रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण मामले में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अधिवक्ता विकेश नेगी ने शिकायतकर्ता की जाति पर सवाल उठाते हुए मुकदमे की कानूनी बुनियाद पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। नेगी का दावा है कि शिकायतकर्ता अमित कुमार आर्य ने खुद को ‘आर्य’ उपजाति का बताया है, जबकि यह नाम उत्तराखंड की अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण मामले में नया मोड़ आ गया है। एक निजी चैनल जय भारत टीवी को दिए इंटरव्यू में अधिवक्ता विकेश नेगी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को ही फर्जी करार दिया है। उनका दावा है कि जिस शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया, उसमें शिकायतकर्ता की जाति को लेकर ही सवाल खड़े होते हैं।
अधिवक्ता विकेश नेगी के मुताबिक, राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले अमित कुमार आर्य ने अपनी उपजाति के रूप में ‘आर्य’ का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि केवल ‘आर्य’ लिखने से किसी व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि उत्तराखंड की अनुसूचित जातियों की सूची में ‘आर्य’ नाम की कोई जाति नहीं है। इसी आधार पर नेगी ने राहुल गांधी को पत्र भेजकर पूरे मामले पर सवाल उठाए हैं।
गौरतलब है कि रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में शामिल विनोद आर्य और अमित कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर राहुल गांधी पर अनुसूचित जाति के खिलाफ आपत्तिजनक एवं जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। पुलिस ने अमित कुमार की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुकदमा संख्या 297/2026 में बीएनएस की धारा 196 और 299 के साथ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(q) लगाई गई है। अब अधिवक्ता के दावे के बाद मामले में शिकायतकर्ता की जाति और एफआईआर की वैधानिकता को लेकर बहस शुरू हो गई है।
