
“मैनेजर रखकर चला सकेंगे होम स्टे” – करन माहरा ने सरकार की नई Bed & Breakfast नीति पर उठाये सवाल।
उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और CWC सदस्य करन माहरा ने राज्य सरकार की Bed & Breakfast (B&B) पंजीकरण नीति पर गंभीर आपत्ति जताई है। माहरा ने कहा कि नई व्यवस्था में संपत्ति का मालिक स्वयं परिसर में न रहकर भी अधिकृत ऑपरेटर, मैनेजर या वाणिज्यिक सेवा प्रदाता के माध्यम से पर्यटन व्यवसाय चला सकता है, जिससे स्थानीय होमस्टे अवधारणा और स्वरोजगार पर खतरा बन सकता है।

माहरा ने याद दिलाया कि होमस्टे योजना का मूल उद्देश्य स्थानीय परिवारों को पर्यटन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और सांस्कृतिक आतिथ्य को सँजोना था। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रावधानों से बाहरी निवेशकों और व्यावसायिक समूहों के लिए राज्य के पर्यटन क्षेत्र में प्रवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं, जो राज्य की भू-नीतियों और सार्वजनिक दावों के बीच विरोधाभास दर्शाता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि बिना स्थानीय निवास की अनिवार्यता के पर्यटन व्यवसाय संचालित करने की अनुमति से स्थानीय युवाओं, छोटे होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। माहरा ने कहा कि इससे ग्रामीण समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक ढांचा और निगरानी-सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रभावित हो सकते हैं।
वहां के कई परिवारों ने पर्यटन उद्योग में अपने जीवनभर की पूँजी और ऋण लगाकर निवेश किया है; माहरा ने कहा कि नई नीति से उनके कारोबार और रोज़गार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि B&B नीति के सभी प्रावधान सार्वजनिक किए जाएँ और स्थानीय प्रतिनिधियों, होटल उद्योग, होमस्टे संचालक तथा सामाजिक संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। माहरा ने कहा कि भूमि, संसाधन और रोजगार पर पहला अधिकार राज्य के लोगों का है और पर्यटन विकास में यह प्राथमिकता बनाए रखी जानी चाहिए।
