
मॉडल जिला बनाने के दावों के बीच आई ये तस्वीर , घायल को डंडे पर लटकाकर पहुंचाया अस्पताल।
चंपावत। चंपावत को मॉडल जिला बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन चम्पावत जिले की दूरस्थ ग्राम पंचायत बकोड़ा की तस्वीर विकास के इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। गांव तक आज भी सड़क नहीं पहुंची है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी के साथ ही आपात स्थिति में भी भुगतना पड़ रहा है।

हाल ही में गांव के एक किसान के घायल होने पर ग्रामीणों ने डंडे और अस्थायी सहारे की मदद से उसे कंधों पर उठाकर कठिन पैदल रास्ते से मोटर मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद ही घायल को वाहन से टनकपुर अस्पताल ले जाया जा सका। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना किसी जंग से कम नहीं है। गंभीर मरीज, गर्भवती महिला, बुजुर्ग या घायल व्यक्ति को समय पर उपचार मिलना मुश्किल हो जाता है। गांव के लोग लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह रावत ने बताया कि सड़क सुविधा के अभाव में गांव से पलायन भी बढ़ रहा है।
वहीं, संबंधित अधिकारी वीरेंद्र सिंह बोहरा के अनुसार सड़क निर्माण की डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि डीपीआर कागजों पर केंद्र तक तो पहुंच गई, लेकिन सड़क बकोड़ा तक आखिर कब पहुंचेगी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासनों और फाइलों में दर्ज सड़क नहीं, बल्कि जमीन पर चलने लायक सड़क चाहिए। मॉडल जिले की असली परीक्षा जिला मुख्यालय की चमक से नहीं, बल्कि उन दूरस्थ गांवों से होगी, जहां आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार है। आज घायल किसान को कंधों पर ढोना पड़ा, कल किसी और की बारी हो सकती है।
