
रानीखेत में भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद् की आमने-सामने की लड़ाई। भाजपा के लिए चुनावी वर्ष में घर के भीतर से ही बड़ी चुनौती।
क्या रानीखेत में भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद् के बीच बढ़ रहा आपसी विवाद आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है ? ये सवाल अब इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि विश्व हिन्दू परिषद् रानीखेत के पदाधिकारी सोशल मीडिया पर लगातार अपना विरोध जता रहे हैं। चुनाव में जहाँ एक एक वोट महत्वपूर्व होता है , ऐसे में आगामी 2027 के चुनावी समीकरण बिगड़ने से भाजपा के लिए परेशानी भी बढ़ सकती है।

दरअसल ये पूरा मामला भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी की फेसबुक लाइव वीडियो के दौरान हिन्दू संगठन पदाधिकारियों और हिन्दू वादी कार्यकर्ताओं के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने के बाद पैदा हुआ। जिसके बाद विश्व हिन्दू परिषद् के एक बड़े नेता ने किसी व्यक्ति की असलियत सामने आने का तंज कसते हुए फेसबुक पोस्ट किया। जिसका जवाब भाजपा पदाधिकारी द्वारा कमेंट में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए दिया गया। हालाँकि अगली सुबह ये कमेंट और वीडियो हटा दिए गए। लेकिन उसके बाद से ही विहिप के कई पदाधिकारी सोशल मीडिया पर लगातार सांकेतिक भाषा में भाजपा के विरोध में दिखाई दे रहे हैं।
इस मामले में मोड़ तब आया जब एक कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर विहिप को अपना सम्मान बनाए रखने के लिए उनकी पार्टी को समर्थन देने का खुला न्योता दे डाला और रानीखेत और प्रदेश को भाजपा की तानाशाही से मुक्त करने की बात कह डाली। वही एक भाजपा नेत्री ने सभी के सनातनी होने की बात कहते हुए अपनी पार्टी के नेता के अपशब्दों के लिए सोशल मीडिया पर माफ़ी मांग डाली।
हालाँकि विश्व हिन्दू परिषद् सीधे सीधे भाजपा का एक अंग नहीं है, लेकिन विचारधारा के मेल होने के चलते विहिप भाजपा को अपना समर्थन देता रहा है। ऐसे में विगत दिनों भाजपा और विहिप की ये तकरार राजनितिक हलकों में चर्चा का विषय रही है। इस आपसी खींचतान का भाजपा नेतृत्व क्या समाधान निकालता है ये देखने योग्य होगा, जिस पर हमारी नज़र बनी रहेगी और हम आगे की अपडेट लेकर आपके सामने फिर उपस्थित होंगे।
